हाँ माँ !
मैं जनता हूँ... मैं प्रिय हूँ तुम्हारा
और मेरी भी तो तुम प्रिय हो...
मैं देखा है हर बार तुम्हें... मेरे दर्द पर फुट पड़ते हुये
पर हर बार में भी फूट पड़ता था माँ,
जब स्कूल जाते वक़्त मेरे साथ मेरी बहने नहीं होती थी
और उस वक़्त भी, जब तुमने मुझे... बहनो से छिपा कर पेडे दिये थे
माँ, अपनी गलतियों पर भी बहनों को मार पड़ने पर में यूंही नहीं रोता था
माँ मुझे तब भी अच्छ नहीं लगता था,
जब मेरी बहने... मेरे छोटे हो चुके कपड़े पहनती थी...
और माँ तब तो सुबक-सुबक के कई मर जाता था...
सर्दी में बहनो की चादर तुम मुझ पर डाल जाती थी
माँ अब आगे नहीं कह पाऊँगा... रुँध गया है गला मेरा...
{भारत} [आज भाई नहीं हूँ, बेटा हूँ]
मैं जनता हूँ... मैं प्रिय हूँ तुम्हारा
और मेरी भी तो तुम प्रिय हो...
मैं देखा है हर बार तुम्हें... मेरे दर्द पर फुट पड़ते हुये
पर हर बार में भी फूट पड़ता था माँ,
जब स्कूल जाते वक़्त मेरे साथ मेरी बहने नहीं होती थी
और उस वक़्त भी, जब तुमने मुझे... बहनो से छिपा कर पेडे दिये थे
माँ, अपनी गलतियों पर भी बहनों को मार पड़ने पर में यूंही नहीं रोता था
माँ मुझे तब भी अच्छ नहीं लगता था,
जब मेरी बहने... मेरे छोटे हो चुके कपड़े पहनती थी...
और माँ तब तो सुबक-सुबक के कई मर जाता था...
सर्दी में बहनो की चादर तुम मुझ पर डाल जाती थी
माँ अब आगे नहीं कह पाऊँगा... रुँध गया है गला मेरा...
{भारत} [आज भाई नहीं हूँ, बेटा हूँ]
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