Saturday, December 10, 2011

भ्रम



रोज़ सुबह

एक भ्रम का उदय होता है

मेरे अन्दर

ये भ्रम

कभी मेरा विश्वास होता है

तो कभी स्वपन

कभी ये परिभाषित होता है

तो कभी अपरिभाषित भी

जो बना रहता है

अगली सुबह तक

फिर से

एक नए भ्रम का उदय होने तक...

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-- रणधीर

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