Saturday, June 23, 2012

आपस में प्रेम करो देश प्रेमियों

आपस में प्रेम करो देश प्रेमियों
♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥

सच कहती है... वो
बादलों के घिरने का उन्माद
उसके बूँद बन बरसने से ज्यादा
उतेज्जना भरा होता है...
वो यह भी कहती है...
दुनिया में सबसे ज्यादा मज़ा
लोगों द्वारा घोषित
सबसे निष्कृत कार्य करने में है...
मैं भी मानता हूँ
क्रांति नियमों के पालन से नहीं
वरण नमक बनाने से आती है
देश का भविष्य
स्कूल-कॉलेजों में उपस्थिति से नहीं
बल्कि एकता की हुंकार लिए
सड़कों पर,
रोड़ों को ठोकर मारते हुए
शहीद होने में है

प्रेम संकुचन है
दायरों का
विचारों का
तो प्रेम एक उड़ान भी है
सपनो का
विचारों का
प्रेम नहीं तोड़ पता
रेशम का पतला तागा भी
तो भर देता है
जूनून और होसला भी

देश का भला प्रेम में ही है
आपस में प्रेम करो
देश से प्रेम करो
नफरत
धोखा और बदले भड़काती है
और प्रेम
त्याग और खुशियाँ फैलाती है

♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥ ♥
{रणधीर भारत }

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